सैरोगेसी से भी दो कदम बढ़ कर है ये तकनीक, जाने आखिर क्या है कृत्रिम गर्भ की कहानी ?
आज हम आपको जिस खबर से रूबरू करवाने वाले है, यह 1996 की बात है. जब धरती पर पहली बार डॉली नाम की एक क्लोन स्तनधारी भेड़ अखबारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी.
जी हां ये खबर पढ़ने में भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन यकीन मानिए ये खबर वास्तव में आपके काम की ही है. गौरतलब है कि उस समय डॉली ने बाकी क्लोन स्तनधारी जानवरो के लिए एक नया मार्ग खोल दिया था.
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि स्कॉटलैंड द्वारा बनाई गई ये भेड़ लम्बे समय तक तो जीवित नहीं रह सकी, लेकिन फिर भी जितने समय तक यह जिन्दा रही, इसने करीब छह सन्तानो को जन्म दिया. जो वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं था.

मगर आपको जान कर ताज्जुब होगा कि अमेरिका के फिलाडेल्फिया में वैज्ञानिको ने दोबारा एक चमत्कार करके दिखा दिया. जी हां यहाँ चिल्ड्रन हॉस्पिटल के शोधकर्ता कृत्रिम यानि बनावटी गर्भ लेकर आए है. दरअसल अब तक समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चो को वेंटिलेटर पर इन्क्यूबेटर्स में रखा जाता था. मगर अब इन शोधकर्ताओं को एक बहुत ही बेहतरीन तकनीक मिल गई है.

वही एक रिसर्च के अनुसार वैज्ञानिको ने बैग यानि गर्भ के अंदर काफी छोटे भ्रूण रखे हुए थे. ऐसे में आपको जान कर हैरानी होगी कि वो भ्रूण महज चार हफ्ते में न केवल विकसित होने लगा, बल्कि साँस भी लेने लगा. जी हां उसकी आंखे भी खुल गई और उसका ऊन भी निकल आया.
अब यूँ तो वैज्ञानिक अपनी इस खोज से काफी खुश है, लेकिन मानव परीक्षण के लिए उन्हें अभी कुछ और वक्त की जरूरत है. जी हां ये खोज तो केवल भेड़ो को लेकर की गई थी,
लेकिन मानव जाति को लेकर परीक्षण करना अभी बाकी है. गौरतलब है कि मानव जीवन में जो बच्चे समय से पहले पैदा होते है, उनमे अक्सर कोई न कोई कमी तो जरूर देखने को मिलती है. मगर इस नयी खोज के बाद डॉक्टरों और वैज्ञानिको के मन में एक नयी उम्मीद सी जागी है.
वही अगर कृत्रिम गर्भ की बात करे तो इसे माँ के गर्भ और बाहरी दुनिया के बीच एक पुल की तरह देखा जा सकता है. बता दे कि इस तकनीक से बच्चे के जिन्दा रहने की सम्भावना बढ़ जाती है.
ऐसे में अगर ये तकनीक चिकित्सा प्रणाली में शामिल हो जाती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों को काफी राहत मिलेगी. हालांकि अभी मानव के बच्चो को कृत्रिम रूप से पैदा किया जा सके, इस तकनीक को लेकर अभी बहुत सा परीक्षण करना बाकी है.
मगर हम उम्मीद करते है कि वैज्ञानिको को जल्द ही इस तकनीक में भी सफलता मिल जाए, ताकि मानव जाति और खास कर माँ और बच्चे को नया और बेहतर जीवन मिल सके.
The post सैरोगेसी से भी दो कदम बढ़ कर है ये तकनीक, जाने आखिर क्या है कृत्रिम गर्भ की कहानी ? appeared first on Daily News.
source https://news98daily.com/scientist-this-research-is-really-helpful-for-children/


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें